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” चरित्र का विकास संगति से होता है , पर बुद्धि का चिन्तन , एकांत के ही विषय है ।”

अगर हमारे स्वभाव या व्यवहार Nature में कृत्रिमता या बनावटीपन Artificially है या फिर हर वक्त खुद को अपने असली व्यक्तित्व real personality से ज्यादा सभ्य या आधुनिक modern दिखाने की फ़िराक में खुद को व्यस्त रखते है तो हम अपनी खुद की पहचान से दूर होते जाते है और इसी तरह कभी किसी भी वक्त किसी असहज अथवा अप्रिय स्तिथि situation या संकट में फसने पर अपने विवेक का इस्तेमाल
नही कर पाते और हार जाते है ।

स्तिथि मुश्किल हो या सरल हम सामान्य normal नही है तो दिक्कत तो आएगी ही उस स्तिथि situation
में दो तरफा मार पड़ती है –

1.  एक तरफ हमारा दिखावा कि हम बहुत मॉडर्न modern या अमीर rich या जिसे अक्सर लोग स्टेटस सिम्बल status symbol कहते है हमे रोकता है कि नही
ऐसा नही कर सकते । लोग क्या सोचेंगे ।

2. दूसरी ओर विवेक या बूद्धि intelligence होते हुए भी समय पर उसका प्रयोग न कर पाने से स्तिथि situation ज्यों की त्यों बनी रहने की मार ।
सो ज्यादा से ज्यादा वही और उसी स्तर पर रहने की कोशिश कीजिये जिसके हकदार आप है न उस से ज्यादा ऊँचा दिखाने की कोशिश करें और न ही ज्यादा निम्न स्तर पर । सरल रहे स्वाभाविक  रहे ।
खुश रहे ।

इसी लेख पर चार चाँद लगाती ये लाइने इस प्रकार है :-

” सुन्दरता की तलाश में चाहे हम सारी दुनिया में घूम आये , पर जब तक वह हमारे अंदर नहीं है तो हमें कही नहीं मिलेगी । ”

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