अगर आपके मन में आसमान में उमड़ती बिजली को देख के ये सवाल उठता के ये बिजली कैसे बनती है और धरती पर क्यों गिरती है ​तो हम आपको बताते है।
 आसमान में अपोजिट एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते और घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाए हुए टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है जो धरती पर गिरती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर न होने से बिजली पृथ्वी पर कंडक्टर की तलाश में पहुंच जाती है, जिससे वो किसी भी कंडक्टर पर गिर जाती है ।

वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत का मौसम आसमानी बिजली के बनने और गिरने में मददगार बनता है। आसमानी बिजली जिन बादलों में बनती है वो अमूमन 10-12 किलोमीटर कद के होते हैं। उनका करीबी हिस्सा सतह से 1-2 किलोमीटर के फासले पर रहता है जबकि दूर का हिस्सा 10-12 किलोमीटर के फासले पर। ऊपरी हिस्से का तापमान गिरकर -35 से -45 डिग्री हो जाता है, वहां मौजूद पानी की बूंदें जमकर बर्फ में बदल जाती हैं, बर्फ के ये टुकड़े नीचे गिरते हैं और एक-दूसरे से टकराते हैं और घर्षण से उनमें पॉजिटिव और निगेटिव कण ऊर्जा पैदा करते हैं। यही ऊर्जा जब मिलती है तब बिजली बनती है और कड़कती है।

बताया जा रहा है कि भारत में मॉनसून के वक्त बना मौसम ऐसे बादलों को बनाता है। लेकिन हकीकत में तो पूरी दुनिया में रोज 8 हजार लाख बार बिजली कड़कती है लेकिन, दुनिया का एक ऐसा इलाका भी है जहां आसमानी बिजली कभी विराम नहीं लेती। इस इलाके को कभी खत्म न होने वाले तूफान का इलाका कहा जाता है। वेनेजुएला में इस इलाके का नाम है लेक मराकाइबो, इसे दुनिया का कुदरती बिजली घर कहा जाता है। यहां साल के 365 दिनों में से 260 दिन तूफान आते हैं।

आसमानी बिजली के सरीर को नुकसान :-


आसमानी बिजली का असर ह्यूमन बॉडी पर कई गुना होता है। डीप बर्न होने से टिशूज डैमेज हो जाते हैं। उनको आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। हार्ट अटैक होने से मौत हो जाती है। इसके असर से शारीरिक अपंगता का खतरा होता है।

कैसे बचें आसमानी बिजली से :-

    अगर बादल गरज रहे हों, और आपके रोंगटे खड़े हो रहे हैं तो ये इस बात का संकेत है कि बिजली गिर सकती है। ऐसे में नीचे दुबक कर पैरों के बल बैठ जाएं। -अपने हाथ घुटने पर रख लें और सर दोनों घुटनों के बीच. इस मुद्रा के कारण आपका ज़मीन से कम से कम संपर्क होगा।-छतरी या मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल न करें और क्या बचाव करने चाहिए जानिए आगे :-
  1. आंधी आते ही टीवी, रेडियो, कंप्यूटर सभी का मोडेम और पॉवर प्लग निकाल दें।
  2. इस दौरान मोबाइल यूज करने से बचें।
  3. नंगे पैर फर्श या जमीन पर कभी खड़े ना रहें।
  4. बिजली उपकरणों से दूर रहें।
  5. बिजली पैदा करने वाली चीजों से दूरी बनाकर रखें रेडिएटर, फोन, धातु के पाइप, स्टोव इत्यादि।
  6. पेड़ के नीचे या खुले मैदान में जाने से बचें। 
  7. खुले मैदान में होने पर किसी बिल्डिंग में छिपने की कोशिश करें।
  8. गीले कपड़ों की वजह से व्रजपात का असर कम हो जाता है। 
  9. बारिश के वक्त हो सके तो बाहर न निकले ।
  10. अगर खुले मैदान में हो तो किसी गाड़ी में जाने की कोशिश करे ।

आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य की ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है।

बिजली मिली सेंकड से कम समय के लिए ठहरती है।

यदि बिजली किसी व्यक्ति पर गिरती है तो सबसे ज्यादा असर उसके सिर, कंधे और गले पर होता है।

बिजली गिरने की सबसे अधिक संभावना दोपहर के वक्त होती है।

बिजली का असर महिलाओं से ज्यादा पुरुषों पर होता है।

कुदरती शक्तियो से लड़ने की बजाये अगर उससे बचने का उपाय करे तो जयादा बेहतर होगा ।

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